टीडीबी के बारे में

भारत सरकार ने सितम्बर 1996 में प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (प्रौ.वि.बो.) का गठन प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड अधिनियम 1995 के तहत एक सांविधिक निकाय के रूप में किया जिसका उद्येष्य स्वदेषी प्रौद्योगिकी कि विकास और वाणिज्यीकरण अथवा आयातित प्रौद्योगिकी के व्यापक घरेलू अनुप्रयोग को बढ़ावा देना है। बोर्ड में 11 सदस्य हैं।

स्वदेषी अनुसंधान के परिणाम के वाणिज्यीकरण के एकमात्र उद्येष्य के साथ टीडीबी सरकारी तंत्र में अपनी तरह का पहला संगठन है। प्रौद्योगिकी उन्मुख उत्पादों के निर्माण के लिए उद्यमों को प्रोत्साहित करके बोर्ड एक सक्रिय भूमिका निभाता है।

टीडीबी, औद्योगिक निकायों और अनुसंधान एवं विकास संस्थानों को इक्विटी या ऋण के रूप में वित्तीय सहायता प्रदान करता है। ऋण पर 5 प्रतिषत प्रति वर्श की दर से साधारण ब्याज लिया जाता है। बोर्ड अपने समर्थक रूख के साथः

  • उद्योग, वैज्ञानिक, तकनीकि विषेशज्ञों के बीच बातचीत की सुविधा प्रदान करता है।
  • उद्यमियों के नई पीढ़ी के निर्माण की सुविधा प्रदान करता है।
  • अन्य समान प्रौद्योगिकी वित्तपोशन निकायों के साथ साझेदारी में सहायता करता है।
  • रोजगार के नए अवसर तैयार करता है।
भारत सरकार द्वारा औद्योगिक निकायों से अनुसंधान एवं विकास उपकर अधिनियम 1986, 1995 में यथा संषोधित, के तहत संग्रहित उपकर में से अनुदान के रूप में निधि प्राप्त करता रहा है। निधि की राषि से निवेष से आय और निधि से संवितरित राषि से वसूली की राषि का उपयोग निधि को बढ़ाने के लिए किया जाता है। आयकर अधिनियम, 1999 के तहत निधि में दान किए गये राषि पर आयकर में पूर्ण कटौती प्रदान की जाती है।