परियोजना मूल्यांक मानदंड

टीडीबी का परियोजना मूल्यांकन मानदंड

टीडीबी वर्शभर आवेदन प्राप्त करता है। औद्योगिक संगठनों द्वारा प्रस्तुत आवेदन को बोर्ड द्वारा वित्तीय सहायता की स्वीकृति से पहले बहुत हीं कठिन मूल्यांकन प्रकिया से गुजरना होता है। इन मूल्यांकन प्रक्रियाओं में प्रारंभिक जांच समिति (आईएससी), परियोजना मूल्यांकन समिति (पीईसी), ड्यू-डिलिजेंस (उच्च परिमाण की परियोजनाओं में) षामिल है। इन स्तरों से मंजूर परियोजना को, अध्यक्ष, उप-समिति या बोर्ड द्वारा अंतिम मंजूरी के लिए भेजा जाता है।

प्रारंभिक जांच समिति (आईएससी)

प्रारंभिक जांच समिति, प्रस्तुत की गई परियोजना की जांच आंतरिक तौर पर आवेदन की पूर्णता, परियोजना का उद्देष्य, प्रौद्योगिकी की स्थिति, आवेदक का पिछला रिकाॅर्ड और परियोजना लागत के आधार पर करती है।

इस तरह की जांच में आवेदक एवं प्रौद्योगिकी प्रदाता के साथ प्रारंभिक चर्चा एवं आवेदन के द्वारा परियोजना पर प्रस्तुतिकरण षामिल हो सकता है। अगर आवेदन, वित्तीय सहायता के लिए टीडीबी की निर्धारित मानदंडों को पूरा नहीं करता और अगर यह किसी और विभाग द्वारा प्रषासित किसी और योजना के तहत आता है तो आवेदन को तद्नुसार सलाह दी जाती है।

टीडीबी द्वारा निर्धारित प्रपत्र-ए में प्राप्त औपचारिक आवेदनों की जांच, प्रारंभिक जांच समिति द्वारा षीघ्रता से की जाती है। अगर परियोजना प्रस्ताव, बोर्ड के परियोजना वित्तपोशण निर्देषिका के तहत नहीं आता है तो इसे अस्वीकार किया जा सकता है और इसकी सूचना आवेदन प्राप्ति की चार सप्ताह के अंदर दे दी जाती है। अगर आवेदन मानदंडों के तहत है परन्तु इसमें कुछ तथ्यों की कमी हों, तो उन्हे आवेदन प्राप्ति के चार सप्ताह के अंदर मंगाया जाता है।

परियोजना मूल्यांकन समिति (पीईसी)

टीडीबी में प्राप्त आवेदन को प्रारंभिक जांच समिति की अनुसंषा के आधार पर परियोजना मूल्यांकन समिति (पीईसी) द्वारा मूल्यांकित किया जाता है।

परियोजना के स्वतंत्र मूल्यांकन के लिए, मामलों के आधार पर, परियोजना की प्रकृति, गोपनीयता आदि का ध्यान में रखते हुए, अध्यक्ष द्वारा विषेशज्ञों (वैज्ञानिक, तकनीकी ओर वित्तीय) वाली एक परियोजना मूल्यांकन समिति की नियुक्ति की जाती है। विषेशज्ञ (सेवा में या सेवानिवृत्त), सरकारी विभागों, अनुसंधान एवं विकास संगठनों, षैक्षनिक संस्थानों, उद्योग, उद्योग संघों और वित्तीय संस्थानों से संबंधित हो सकते हैं। पीईसी में एक सफल प्रवर्तक से एक सफल उद्यमी बन चुका व्यक्ति भी षामिल हो सकता है। पीईसी का गठन 4 सदस्यों से कम का नहीं होना चाहिए।

आवेदनों को वैज्ञानिक, प्रौद्योगिकीय, वाणिज्यिक एवं वित्तीय प्राथमिकता के आधार पर मूल्यांकित किया जाता है। मूल्यांकन प्रक्रिया में निम्नलिखित शामिल है:

  • प्रस्ताव के विषयों का अनूठा एवं नवीनात्मक होना
  • सुदृढ़ता, वैज्ञानिक गुणवत्ता और प्रौद्योगिकीय प्राथमिकता
  • वृहत रुप से लागू करने के लिए और वाणिज्यीकरण से लाभप्रद संभावना
  • प्रस्तावित प्रयास की पर्याप्तता
  • प्रस्तावित कार्यवाई नेटवर्क में आर एंड डी संस्थानों की क्षमता
  • आंतरिक प्राप्ति सहित एंटरप्राइज की संगठनात्मक एवं वाणिज्यिक योग्यता
  • प्रस्तावित लागत और वित्त पोषण के तरीके की औचित्यपूर्णता
  • मापयोग्य उद्देश्य, लक्ष्य और निर्धरित लक्ष्य
  • उद्यमी का पिछला रिकाॅर्ड

पीईसी सामान्यतः

अपनी मूल्यांकन बैठक का आयोजन परियोजना की जगह या उसके आसपास करता है। आवेदन को प्रौद्योगिकी प्रदाता के साथ विस्तृत तकनीकी, वित्तीय और वाणिज्यीक प्रस्तुतीकरण सहित अपनी परियोजना प्रस्ताव के सभी पहलुओं को प्रस्तुत करने का पूरा अवसर दिया जाता है।

ड्यू-डिलिजेंस

10 करोड़ रू. से अधिक की वित्तीय सहायता और / या 30 करोड़ रू. के अधिक की परियोजना लागत वाले प्रस्तावों के लिए एक बाहरी एजेंसी द्वारा ड्यू-डिलिजेंस कर आयोजन किया जाता है।