उद्यम पूंजी निधि

यह देखा गया कि कई तकनीकी आधारित परियोजनाएं, वित्तीय संस्थानों और वाणिज्यीक बैंकों की पारंपरिक आवष्यकताओं को पूरा करने में असमर्थ हैं। इसके अतिरिक्त, स्वदेषी तकनीकी के विकास एवं वाणिज्यीकरण को प्र्रत्यक्ष सहायता करने के लिए टीडीबी ने प्रौद्योगिकी केंद्रित उद्यम पूंॅजी निधियों (वीसीएफ) को प्रोत्साहित करने के लिए अन्य संस्थानों से नेटवर्किंग की आवष्यकता को महसूस किया ताकि तकनीकी रूप से अभिनव व्यवहार्य परियोजनाओं के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता की कमी एक बाधा न बन पाये। स्वदेषी तकनीकी के वाणिज्यीकरण के उद्देष्य को, प्रौद्योगिकी केंद्रित उद्यम पूंजी संस्थानों के साथ मिलकर पूरा किया जा सकता है। यह निवेषकों को प्रौद्योगिकी उन्मुख उद्यमों के लिए संसाधनों की उपलब्धता पर गुणक प्रभाव बनाने के लिए निधि में भाग लेने के लिए भी प्रोत्साहित करेगा। इसलिए टीडीबी ने नवाचार और अभिनव उत्पाद/सेवाओं वाले एसएमई के माध्यम से प्रारंभिक चरण के उद्यमों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए उद्यम पूंजी निधि में भाग लिया। टीडीबी की प्रेरणा और सहायता उद्यम पूंजीपतियों द्वारा टीडीबी के मिषन में सहायता के संयोजन के परिणाम के रूप में सामने आया। बोर्ड ने भी वीसीएफ में टीडीबी की भागीदारी को, विषेशकर एमएसएमई /एसमएई श्रेणी में नवाचार और अभिनव उत्पादों / सेवाओं वाले तकनीकी कंपनियों का समर्थन करने को, टीडीबी के मैंडेट के विस्तार के लिए एक उत्कृश्ट उपकरण माना है।

हालांकि, उपरोक्त विचार/प्रक्रिया एक समयावधि में विकसित हुई है। भारत में यूटीआई, 1997 में इंडिया टेक्नोलाॅजी वेंचर स्कीम के नाम से एक वेंचर स्कीम की षुरूआत करने वाली पहली कम्पनी थी। 1999 में यूटीआई के न्यासीओं ने टीडीबी के तत्कालीन अध्यक्ष और सचिव से मुलाकात की और उद्यम पूंजी निधि में टीडीबी की भागीदारी का अनुरोध किया। बोर्ड ने 19 नवम्बर, 1999 को आयोजित अपनी 19वीं बैठक में 25 करोड़ रू. की भागीदारी के साथ यूटीआई- इंडिया टेक्नोलाॅजी वेंचन यूनीट स्कीम में टीडीबी की भागीदारी को अनुमोदित किया। यह किसी भी उद्यम पूंजी निधि में टीडीबी द्वारा पहली प्रतिबद्धता थी जिसके लिए समझौते पर हस्ताक्षर दिनांक 6 जूलाई, 2000 को किया गया। इसके बाद, टीडीबी ने मामले के आधार पर सीमित देयता भागीदार के रूप में कई उद्यम पूंजी में भाग लेने का निर्णय लिया।

अब तक टीडीबी ने मुख्य रूप से प्रौद्योगिकी उन्मुख और प्रारंभिक चरण की परियोजनाओं को लक्षित उद्यम पूंजी निधियों में भाग लिया है जहां टीडीबी की उपस्थिति अपर्याप्त है। टीडीबी की पहल ने वेंचर कैपिटलिस्ट/प्राइवेट इक्विटी फंड्स को भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास के चालक क्षेत्रों में तकनीक आधारित परियोजनाओं को समर्थन देने के लिए आगे आने का आष्वासन प्रदान किया है।

बोर्ड ने अपनी विभिन्न बैठकों में, प्रौद्योगिकी उन्मुख परियोजनाओं के आधार को विस्तारित करके अपने लक्ष्य को हासिल करने के उद्देष्य से वीसीएफ में टीडीबी की भागीदारी के महत्व को मान्यता दी है।

बोर्ड ने 17 मार्च, 2010 को आयोजित अपनी 44वीं बैठक में टीडीबी द्वारा वेंचर कैपिटल फंड को दिये गये सहायता पर विचार करने और इसकी समीक्षा करने के साथ टीडीबी द्वारा वीसीएफ को सहायता देने के लिए अपनाई जाने वाली पद्वति पर सुझाव देने के लिए एक समिति गठित करने का निर्णय लिया।

टीडीबी से संपर्क करने वाले उद्यम निधि कंपनियां में, फंड प्रकार, आकार, फोकस क्षेत्र, ट्रैक रिकाॅर्ड, योगदान राषि, निधि संयोजक/प्रमोटर आदि मामलों में भिन्नता होती है, टीडीबी द्वारा अपने अंतिम लक्ष्य को हासिल करने के उद्देष्य से वेंचर कैपिटल /प्राईवेट इक्विटी घरानों के माध्यम से अच्छी तकनीकी रूप से अभिनव व्यवहार्य परियोजनाओं को समर्थन करने के लिए टीडीबी द्वारा वेंचर फंड में भागीदारी के लिए दिषानिर्देष तैयार करने की आवष्यकता महसूस की गई।

बोर्ड ने 17 मार्च, 2010 को आयोजित अपनी 44वीं बैठक में वेंचर कैपिटल फंड में भागीदारी के लिए निवेष नीति पर विस्तृत चर्चा के बाद, निम्नलिखित दिषानिर्देषों का पालन करने का फैसला लिया:-

  • टीडीबी फंड मुख्य रूप से अभिनव और/या प्रौद्योगिकी उन्मुख पोर्टफोलियो में निवेष की नीति वाले वीसीएफ में दिये जाएंगे।.
  • छोटे से मध्यम आकार की निधि में योगदान को प्राथमिकता दी जायेगी।
  • वीसीएफ के लाभार्थियों को मुख्यतया एसएमई क्षेत्र से होना चाहिए।
  • वीसीएफ में टीडीबी का योगदान सामान्यतया 15%: तक होगा। वीसीएफ के समावेषी विकास / औद्योगिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों या प्रथम पीढ़ी के उद्यमी को अभिनव सेवा देने के मामलों में 25%: तक के उच्च योगदान पर भी विचार किया जा सकता है। 100%: प्रौद्योगिकी उन्मुख पोर्टफोलियों के लिए बोर्ड की मंजूरी के आधार पर टीडीबी द्वारा उच्च योगदान पर भी विचार किया जा सकता है।
  • एक निरीक्षण तंत्र के रूप में, टीडीबी का प्रतिनिधि, प्रौद्योगिकी प्रस्तावों पर विचार के लिए, वीसीएफ की निवेष समिति का सदस्य होगा।
  • प्रतिनिधि को पोर्टफोलियों को संतुलित करने के लिए अपवाद बनाने के लिए अधिकृत किया जाएगा।
  • निधि नियोजक के ट्रैक रिकाॅर्ड पर विचार किया जायेगा।
  • वित्तीय सेवाओं को महत्व नहीं दिया जायेगा।

टीडीबी ने अब तक अन्य निवेशकों से कुल 2463ण्00 करोड़ रु. के निधियों तक पहुंच बनाते हुए 285ण्00 करोड़ रु. की प्रतिबद्धता/भागीदारी के साथ अब तक कुल 11 उद्यम पूंजी निधियों में भागीदारी की है।